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शनिवार, 3 सितंबर 2011

कविताकोश का नया प्रारूप: योगदानकर्ता का महत्व पहचाना गया

अपने पिछली पोस्ट में मैने कविताकोश विवाद पर किसी प्रकार की अग्रेतर टिप्पणी न करने का विचार किया था परन्तु इधर कुछ नये तथ्य संज्ञानित होने के बाद स्वयं को लिखने से नहीं रोक पा रहा हूँ। अनूप भार्गव जी के नये पत्र की पहली पंक्ति में सारा सार निहित है कि-

‘‘अब अगर बात हो भी सकती है तो सिर्फ इस पर कि पहले गलती किसने की या किसकी गलती ज्यादा थी’’




मेरे विचार में अब कविताकोश पाँच वर्षो का हो चुका है सो यह बालक

सहारा लेकर चलने के स्थान पर अपने पैरों पर खडा होने की कोशिश करता दिखलाई पड रहा है। कम से कम बीते कल कविताकोश के संस्थापक ललित जी के ब्लाग दशमलव पर कविताकोश के लिये प्र्र्र्र्र्रस्तावित नयी परियोजना से संबंधित प्रकाशित प्रारूप पढकर तो यही भान होता है।

यह देखकर प्रसन्नता हुयी कि संस्थापक महोदय द्वारा योगदानकर्ताओं के महत्व को पहचानकर उन्हे उचित समादर देने का प्रयास किया गया है। वास्तव में कविताकोश के पाँच वर्ष पूर्ण होने पर कविताकोश द्वारा विज्ञापित अनेक बडी योजनाओं के बीच मैने भी योगदानकर्ताओं के लिये इस एक छोटे से ब्लाग की शुरूआत की थी ‘कविताकोश योगदानकर्ता मंच’ । इस मंच को आर्शिवाद प्रदान करने हेतु सभी प्रमुख योगदानकर्ताओं को मेल भी किया था। दुर्भाग्यवश कविताकोश सम्मान समारोह 2011 की समाप्ति के उपरांत कोश के शीर्षस्थ सदस्यो में विद्यमान अंतरकलह सार्वजनिक हुयी और उसकी परिणति स्वरूप कविताकोश की प्रतिष्ठा को ठेस लगी।

मेरे आकलन में कविताकोश परियोजना हिन्दी में उपलब्ध पद्य साहित्य को व्यवस्थित रूप से एक पटल पर लाने भर की परियोजना है। इसमें कवियों के द्वारा सृजित साहित्य को एकत्रित करने का कार्य ही प्रमुखता से होना चाहिये। उत्कृष्ट साहित्य सृजन को पुरस्कृत करने हेतु हमारे देश और विदेश मे मंचों की कमी नहीं है। कमी है तो सृजित साहित्य को एकीकृत करने की जिसका बीडा कविताकोश ने उठाया था।

यह सही है कि उत्कृष्ट साहित्यकारो के मार्गदर्शन से यह परियोजना एक इनसाक्लोपीडिया का रूप लेती जा रही है परन्तु मेरे विचार में सृजित साहित्य को एकत्रित करने का कार्य करने वाले योगदानकर्ताओं को पुरूस्कृत करना आपकी भावी योजना का प्रमुख अंग होना चाहिये । यदि वह योगदानकर्ता साहित्यकार/कवि /लेखक भी है तो इस परियोजना में पुरस्कृत होने का पहला हक हासिल है।

जिन लोगों ने अपने व्यस्त दिनचर्या से समय निकाल कर कोश में साहित्य जोडकर इसे समृद्ध बनाने में योगदान किया है मेरे विचार में वही इस श्रम और उसकी महत्ता को समझता है। जिन्होंने कोश के समृद्धीकरण में योगदान न करने के बावजूद इस कोश की ओर से सम्मानित होने के अवसर को पाया कदाचित वही आज इसके दुष्प्रचार में शामिल हैं।


कोश के भविष्य के लिये मेरे कुछ सुझाव हैः-

सुझावः-1



कविताकोश में योगदानकर्ता को स्वयंसेवक योगदान के स्थान पर पारिश्रमिक योग्य योगदान की श्रेणी मे रखा जाय इसके लिये आप पृष्ठवार अथवा अपलोडेड सामग्री की बाइट के अनुसार न्यूनतम दर निश्चित कर सकते हैं। (परन्तु कविताकोश की सामान्य मेल में प्राप्त होने वाली यूनीकोडित कविताओं को कोश में शामिल करने वाले संपादकीय टीम के लिये प्रावधान पृथक से किया जाना होगा क्योकि संस्थापक महोदय से हुयी बातचीत में यह जान पाया हूँ कि बहुत से योगदानकर्ताओं के साथ प्रदर्शित भारी भरकम पृष्ठ जोडने संबंधी आंकडे विभिन्न लेखकों की मेल के संलग्नकों में प्राप्त सामग्री की कटिंग पेस्टिंग होने का नतीजा भर होती है।)

सुझावः-2



कोश में जोडे जाने वाले पृष्ठो की एक न्यूनतम संख्या को पारिश्रमिक हेतु अर्हता के लिये निर्धारित किया जा सकता है यथा 200 पृष्ठ....अर्थात न्यूनतम 200 पृष्ठो का योगदान करने के बाद ही किसी भी योगदानकर्ता का योगदान पारिश्रमिक योग्य होगा।

सुझावः-3



अधिक पृष्ठों का योगदान करने वाले योगदानकर्ता के प्रति 500 पृष्ठो के योगदान के उपरांत उसके द्वारा योगदानित पृष्ठों को कविताकोश की ओर से प्रशस्त्रि प्रमाण पत्र सहित एक आकर्षक प्रोजेक्ट पुस्तिका (स्मारिका) के रूप में उपलब्ध कराया जायेगा।

सुझावः-4



कविताकोश अपने योगदानकर्ताओ के द्वारा रचित साहित्य के प्रोत्साहन हेतु विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन कर सकता है। वरिश्ठ साहित्यकारों से इस हेतु निशुल्क अथवा सशुल्क (जैसी भी स्थिति हो) सहयोग की अपील की जा सकती है।

सुझावः-5



कविताकोश में जुडने की इच्छा रखने वाले नये लेखको का नाम जोडे जाने से पूर्व इसमें योगदान की न्यूनतम सीमा (यथा 100 पृष्ठों का योगदान आवश्यक ) निश्चित किये जाने पर भी विचार किया जा सकता है।
सुझावः-6



इसके अतिरिक्त कविताकोश में संकलित साहित्य की उत्कृष्टता बनाये रखने के उद्देश्य से इसमें जोडे जाने वाले हर नये नाम की रचनाओं का स्तर परखकर उसका नाम जोडने संबंधी निर्णय, एवं अन्य संपादकीय निर्णय यथा रचनाओं की श्रेणी, नया अनुभाग बनाने आदि आदि निर्णय हेतु किसी वरिश्ठ साहित्यकार को पूर्णतः (पुनश्च पूर्णतः) अधिकृत करने पर भी विचार किया जा सकता है। (इसके लिये पूर्व में इस परियोजना हेतु आयु एवं साहित्यिक ज्ञान दोनो में वरिष्ठ तथा पूर्णतः समर्पित योगदानकर्ता अथवा योगदानकर्ताओं से यदि याचक के शब्दों में भी अनुरोध करना पडे तो इसमें किसी प्रकार का संकोच नहीं होना चाहिये।)





मेरे इन सुझावों का भविष्य जैसा भी हो परन्तु यह मेरी हार्दिक कामना है कविताकोश रूपी पाँच वर्षीय बालक जो आज सहारा लेकर चलने के स्थान पर अब अपने पैरों पर खडा होने की कोशिश करता हुआ दीख रहा है वह एक शक्तिशाली युवक के रूप में विकसित हो।
अब तक अपने सहयोगियों की उँगली पकडकर चलना सीखने वाले इस बालक को शायद कुछ समय बाद आप अंतराष्ट्रीय फलक पर कुलांचे मारते हुये देख सकें।

2 टिप्‍पणियां:

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